Him Sanskriti Shodh Sansthan

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WELCOME TO HIM SANSKRITI SHODH SANSTHAAN

हिम संस्कृति शोध संस्थान हिमाचल प्रदेश की समृद्ध विरासत में निहित सांस्कृतिक अनुसंधान और संरक्षण के लिए समर्पित एक केंद्र है। हमारा उद्देश्य हमारी सभ्यता की नींव रखने वाली विविध परंपराओं, भाषाओं और लोक प्रथाओं का अध्ययन, दस्तावेजीकरण और प्रचार करना है। संस्थान प्राचीन लिपियों, मौखिक इतिहासों और स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करता है, साथ ही सांस्कृतिक अध्ययन में आधुनिक अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करता है। सेमिनार, कार्यशालाओं और सामुदायिक परियोजनाओं का आयोजन करके, हम जागरूकता पैदा करने और अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने की भावना को प्रेरित करने का लक्ष्य रखते हैं। हिम संस्कृति शोध संस्थान परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सेतु का काम करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि अतीत का ज्ञान आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहे।

Dr YagyaDutt Sharma

Shastri | Jyotish Acharya | Ph.D. (Indian Algebra) | Former Principal, Traditional Gurukul (2018–2021) | Assistant Professor, Central Sanskrit University (2022–Present)

डॉ. यज्ञदत्त शर्मा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। वे शास्त्री, ज्योतिष आचार्य और भारतीय बीजगणित में विद्यावारिधि (Ph.D.) उपाधिधारक हैं। 2018 से 2021 तक उन्होंने पारंपरिक गुरुकुल में प्राचार्य के रूप में कार्य किया और 2022 से अब तक केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य (Assistant Professor) के पद पर कार्यरत हैं।

“हमारी संस्कृति ही हमारा असली आधार है” इस मंत्र को जीवन का ध्येय मानते हुए डॉ. शर्मा पिछले 18 वर्षों से विलुप्तप्राय टांकरी लिपि के पुनर्जीवन और संरक्षण में सतत प्रयत्नशील हैं। उन्होंने इस प्रयास को केवल शोध तक सीमित न रखकर इसे जन-आंदोलन का रूप देने के लिए एक संगठन की स्थापना की।

उनका मानना है कि लिपि केवल अक्षरों का समूह नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान की आत्मा है। इसी सोच के साथ वे कार्यशालाओं, शोध लेखन, सांस्कृतिक संगोष्ठियों और शैक्षणिक पहलों के माध्यम से टांकरी और पहाड़ी भाषाओं को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहे हैं। उनकी यात्रा पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध का अनूठा संगम है, जो उन्हें भारत की भाषाई और सांस्कृतिक धरोहर का सच्चा वाहक बनाती है।

LATEST update & Announcements

धनोट में हिम लोक-संस्कृति महोत्सव 2026, टांकरी लिपि बनी मुख्य आकर्षण

। स्वस्ति श्री गणेशाय नमः।। हिमाचल प्रदेश के पूर्ण राज्यत्व दिवस के पावन अवसर पर वेद धारा ग्लोबल स्कूल(VedDhara Global School), धनोट, ज्वालामुखी एवं सा रे गा मा संगीत अकादमी,

टांकरी मातृका के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु विशेष पहल – दशहरा उत्सव, कुल्लू

प्रेस विज्ञप्ति हिम संस्कृति शोध संस्थान एवं श्री खुडीजहळ धाम परिवार के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष के दशहरा उत्सव, कुल्लू में टांकरी मातृका के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य